समझ का अँधेरा  अधिवक्ता कर्ण निकुंभ Karan Nikumbh

समझ का अँधेरा अधिवक्ता कर्ण निकुंभ

Rs. 249.00
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समझ का अँधेरा  अधिवक्ता कर्ण निकुंभ Karan Nikumbh
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📖 अध्याय संग्रह
समझ का अँधेरा के 20 जीवन बदलने वाले अध्याय
अध्याय 1
अधूरी सफलताओं के अभिनेता
अध्याय 2
जब कुछ नया करने का मन हो ठहर जाओ
अध्याय 3
मैं पढ़ना चाहता हूँ, लेकिन पढ़ नहीं पाता
अध्याय 4
मनुष्य स्वयं का जल्लाद है
अध्याय 5
सर्वस्व पाने की अंतिम शर्त
अध्याय 6
व्यवहार से भाग्य का पतन और उदय
अध्याय 7
भटकते मन के अभ्यास का परिणाम
अध्याय 8
दिशाहीन चेतना का रहस्य
अध्याय 9
समय के विरुद्ध बयान
अध्याय 10
अदृश्य योद्धा
अध्याय 11
सफलता के छिपे हुए शत्रु
अध्याय 12
अध्ययन कब चेतना में उतरता है
अध्याय 13
तुम्हें हारने का बहाना मिल जाता है
अध्याय 14
नौकरी का विरासत पत्र
अध्याय 15
बीज में वृक्ष छिपा होता है, विचारों में भविष्य
अध्याय 16
अहंकार की आध्यात्मिक भाषा से व्यक्ति का पतन
अध्याय 17
क्यों समय बदलने के बाद भी परिणाम नहीं बदलते
अध्याय 18
सफलता की अग्नि परीक्षा नियति के साथ
अध्याय 19
शिकायत से स्वीकार तक
अध्याय 20
शुरुआत का साहस

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समझ का अँधेरा
अध्याय 1
अधूरी सफलताओं के अभिनेता
⏱ 8-10 मिनट पढ़ने का समय

मैंने जीवन में एक समय ऐसा देखा, जहाँ मुझे सफलता से अधिक असफलता को समझने की जिज्ञासा हुई।

क्योंकि सफल व्यक्ति अक्सर अपनी चमक दिखाता है, लेकिन असफल व्यक्ति अनजाने में अपने जीवन का सच खोल देता है।

मैं उन लोगों से मिलने निकला जिन्हें समाज प्रतिभाशाली कहता था, लेकिन जब उनके कर्मों को देखा तो एक अलग ही सत्य सामने आया।

सफलता मेहनत से ज्यादा
आलोचनाओं पर सब्र मांगती है।

जिस दिन मनुष्य कर्म से अधिक उसकी चर्चा का आनंद लेने लगे, समझ लेना चाहिए कि उसका ध्यान लक्ष्य से हट चुका है।

✍ कर्ण निकुंभ
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Author
✍ लेखक परिचय
कर्ण निकुंभ
Author of "समझ का अँधेरा"
कर्ण निकुंभ उन दुर्लभ लेखकों में से हैं जो केवल सिद्धांतों की बात नहीं करते, बल्कि जीवन के वास्तविक अनुभवों, संघर्षों और मानवीय व्यवहार के गहरे अवलोकन को शब्दों में ढालते हैं। उनकी पुस्तक "समझ का अँधेरा" केवल सफलता की चर्चा नहीं करती, बल्कि उन अदृश्य कारणों को उजागर करती है जो लोगों को वर्षों तक प्रयास करने के बाद भी अपने लक्ष्य से दूर रखते हैं।
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